सोमवार, 13 जून 2011

जापानी पाठ - ढाबे में - भाग 2

ढाबे में - भाग 1 में हमने भोजन सम्बन्धी कई नये शब्द सीखे। आइये एक वार्तालाप के द्वारा उनके वाक्य प्रयोग देखें।

* क्या पास में कोई भारतीय ढाबा है?
- चिकाकु नी इन्दो र्यूरी नो रेसुतोराँ वा अरि मासु का?

* क्षमा कीजिये, मुझे पता नहीं।
- सुई मा सेन। शिरि मा सेन।

* वहाँ एक जापानी ढाबा है।
- सोको नि निहॉन र्यूरी तेन गा अरिमासु।

* धन्यवाद, हम वहाँ जायेंगे।
- अरिगात्तो गोज़ाइमासु! सोको नि इकि मासु।

* यही स्थल है।
- कोरेगा सोनो बस्यो देसु।

* स्वागत है!
- योकोसो!

* क्या आपका आरक्षण है?
- योयाकु वा अरि मासु का?

* नहीं, मैंने टेबल बुक नहीं कराई थी।
- ईये, वताशि वा योयाकु शिमासेन।

[शेष अगले अंक में]

3 टिप्‍पणियां:

  1. अनुराग जी जापानी लोगों ने मुझे हमेशा ही आकर्षित किया. इसी आकर्षण से बंधकर कुछ समय के लिए जापानी भाषा सिखाने का प्रयास भी किया. जापानी भाषा का ज्यादा कुछ याद नहीं बस हाँ को वो लोग हाई और ना को ईए का प्रयोग करते थे. (आपने अंतिम वाकया में नहीं को 'लिये' अनुवादित किया है. क्या यह दूसरा dialect है) हमें जापानी भाषा अंग्रेजी माध्यम से सिखाई जाती थी जबकि इस भाषा का syntax बिलकुल अपनी हिंदी जैसा ही है. मुझे तब ये बात बहुत अखरी थी. उस दौरान कुछ जापानियों के संपर्क में आकार मुझे पता चला था की वो लोग हम भारतीयों के प्रति सम्मान की भावना रखते हैं. दिल्ली के फिरोजशाह रोड वाले जापान कल्चरल सेंटर पर हफ्ते में दो बार आना जाना होता था. आपके इस ब्लॉग पर आकर बहुत सी पुरानी यादें ताजा हो गयीं. आपका धन्यवाद.

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  2. विचार शून्य जी, ग़लती ठीक कर दी गयी है, ध्यान दिलाने का धन्यवाद! आपकी पुरानी यादें ताज़ा हुईं, खुशी हुई!

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  3. bahut hi badiya... kuch jaapaani to seekh hi lenge yahan se..... :)
    अरिगात्तो गोज़ाइमासु !
    मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)

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